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फर्जी सर्टिफिकेट का इस्तेमाल छोड़ो, जाली नामों से नौकरी कर चुकी है पूजा खेडकर; नए खुलासे से मचा हड़कंप

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 फर्जी सर्टिफिकेट का इस्तेमाल छोड़ो, जाली नामों से नौकरी कर चुकी है पूजा खेडकर; नए खुलासे से मचा हड़कंप



Pooja Khedkar News: पावर का गलत उपयोग और विकलांगता का फर्जी सर्टिफिकेट दिखाकर नौकरी पाने के आरोपों में घिरीं पुणे की ट्रेनी IAS पूजा खेडकर को लेकर हर रोज नए खुलासे हो रहे हैं. पूजा खेडकर को लेकर हुए ताजा खुलासे में पता चला है कि वह दो अलग अलग नामों खेडकर पूजा दिलीपराव और पूजा मनोरमा दिलीप खेडकर, से सिविल सेवा की परीक्षा में शामिल हो चुकी हैं.

2019 में खेडकर पूजा दिलीपराव

साल 2019 में जब उन्होंने सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा दी तो परीक्षा में उन्होंने अपना नाम खेडकर पूजा दिलीपराव लिखा था. SAI में तैनाती के दौरान वह PwBD प्रमाणपत्र के साथ इसी नाम का इस्तेमाल कर रही थीं

2022 में पूजा मनोरमा दिलीप खेडकर

जब उन्होंने 2022 में यूपीएससी की परीक्षा दी और IAS में चयनित हुईं तब उनका नाम पूजा मनोरमा दिलीप खेडकर था. इस परीक्षा में भी उन्होंने PwBD कैटेगिरी का प्रमाणपत्र लगाया था. यानी उन्होंनो दो बार अलग-अलग नामों से परीक्षा दी.

2022 में किया था लोकोमोटर विकलांगता प्रमाणपत्र के लिए आवेदन

अगस्त 2022 में पूजा ने पुणे के दो जिला अस्पतालों औंध और यशवंतराव चव्हाण मेमोरियल हॉस्पिटल पिंपरी में लोकोमोटर विकलांगता के लिए विकलांगता प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया था. उन्होंने 2018 में कम दृष्टि के लिए और 2022 में अहमदनगर जिला अस्पताल से मानसिक अवसाद और कम दृष्टि का विकलांगता प्रमाण पत्र प्राप्त करने के बावजूद ऐसा किया.

हालांकि दूसरी बार आवेदन को लेकर औंध जिला अस्पताल ने उनका प्रमाणत्र बनाने से इनकार कर दिया था जबकि पिंपरी स्थित यशवंतराव चव्हाण अस्पताल (YCMH) ने पुराना एसीएल फटने का हवाला देते हुए उन्हें 7% लोकोमोटर विकलांगता का प्रमाणपत्र दे दिया था.

तीन-तीन प्रमाणपत्र दिखाकर पाई IAS की नौकरी

2022 में पूजा भारतीय राजस्व सेवा (IRS) अधिकारी थीं, 2021 तक वह भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) में सहायक निदेशक रहीं. IRS में भी उनका चयन PwBD (कम दृष्टि) के तहत हुआ था. हालांकि उसी साल जब उन्होंने UPSC की परीक्षा दी तो IAS के पद पर उनका चयन ओबीसी और PwBD (MD) (एक से अधिक विकलांगता श्रेणियां) कोटे से हुआ. इससे साफ हो जाता है कि पूजा को IAS की नौकरी दिलाने में ग्रैर क्रीमी लेयर प्रमाणपत्र के साथ-साथ ओबीसी कोटा के अलावा तीन विकलांगता प्रमाणपत्रों ने मदद की.

YCMH अस्पताल में परास्नातक संस्थान के डीन डॉ. राजेंद्र वाबले ने काह कि उन्होंने प्रमाणित किया था कि पूजा को 7% लोकोमोटर विकलांगता है. उन्होंने कहा, ‘हम मानते हैं कि पूजा के आवेदन को औंध अस्पताल ने इसलिए ठुकरा दिया था क्योंकि हम पहले ही उनका प्रमाणपत्र जारी कर चुके थे.’

YCMH द्वारा पूजा को जारी किए गए लोकोमोटर विकलांगता प्रमाणपत्र के मुताबिक, ‘पूजा के पुराने एसीएल के फटने के साथ-साथ उनके बांए घुटने में अस्थिरता का निदान हुआ था. साथ ही उनके बाएं शरीर के निचले हिस्से में 7 प्रतिशत स्थाई विकलांगता है.’

अहमदनगर कलेक्टर को सौंपी गई रिपोर्ट

इसी बीच अहमदनगर जिले के सिविल सर्जन डॉ. संजय घोगरे ने अहमदनगर कलेक्टर को सोमवार को एक रिपोर्ट सौंपी जिसमें उन्होंने दो प्रमाणपत्रों का जिक्र किया जो पूजा को 2018 और 2021 में जारी किए गए थे. रिपोर्ट के मुताबिक, पूजा में 40% कम दिखाई देने का पता चला था. वहीं साल 2021 में उन्हें तनाव और कम दिखाई देने का प्रमाणपत्र जारी किया गया था. अहमदनगर सिविल अस्पताल ने इस स्वत: उत्पन्न हुई विकलांगता का मूल्यांकन 51% किया था. उन्होंने कहा कि कलेक्टर इस रिपोर्ट को संभागीय आयुक्त और राज्य के विकलांगता आयुक्त को सौंपेंगे.

रिपोर्ट कहती है, ’25 अप्रैल 2018 को पूजा खेडकर की एक नेत्र सर्जन ने जांच की थी जिसमें उन्होंने पाया कि पूजा 40% स्थाई विकलांगता से साथ निकट दृष्टि दोष के साथ उच्च निकट दृष्टि दोष से पीड़ित हैं. जांच रिपोर्ट के अनुसार, पूजा को 25 अप्रैल 2028 को SADM का विकलांगता प्रमाणपत्र जारी किया गया और इसकी डिटेल अस्पताल के पास उपस्थित है.’ रिपोर्ट आगे कहती है, ’18 जनवरी 2021 को पूजा की मनोरोग चिकित्सक ने जांच की जिसमें बता चला कि वह अवसाद से पीड़ित हैं.’

क्या पूजा को कम दिखाई देता है

UDID के अनुसार, 28 जनवरी 2021 को पूजा को जारी प्रमाणपत्र के मुताबिक उन्हें दोनों आंखों से 40% कम दिखाई देता है. साथ ही उनकी स्वत: उत्पन्न हुई विकलांगता भी 51% है.

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