हिमाचल प्रदेश में मानसून (Monsoon in Himachal) किसानों के लिए तबाही बनकर आई है। पहली बारिश में ही करोड़ों रुपये की फसलें बर्बाद हो गईं। कृषि विभाग द्वारा सभी जिलों से जुटाए आंकड़ों व साक्ष्यों की रिपोर्ट आई है जिसमें मंडी में 58 लाख रुपये चंबा में 50 लाख रुपये के नुकसान का आकलन है। वहीं मानसून से सब्जी की फसलों को भी नुकसान हुआ है।
हिमाचल प्रदेश में इस बार मानसून की पहली वर्षा से फसलों को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। कृषि विभाग की ओर से सभी जिलों से जुटाए गए आंकड़ों व साक्ष्यों की रिपोर्ट अब आई है। भारी वर्षा और बाढ़ आने के कारण 1.32 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। इसमें से 1.08 करोड़ रुपये का नुकसान दो जिलों मंडी और चंबा में हुआ है।
2034 हेक्टेयर में फसलों को हुआ नुकसान
मंडी में करीब 58 लाख रुपये और चंबा में 50 लाख रुपये के नुकसान का आकलन किया गया है। प्रदेश में 2034 हेक्टेयर में फसलों को नुकसान हुआ है। इसमें से 92 हेक्टेयर में फसल बह गई और मलबा भर गया।
प्रदेश में भारी वर्षा और बाढ़ आने के कारण सबसे अधिक नुकसान टमाटर व सब्जी की फसल को हुआ है। प्रदेश में 1152 हेक्टेयर में सब्जी को नुकसान हुआ। मंडी जिले की बल्ह घाटी में लाखों रुपये की टमाटर की फसल नष्ट हो गई।
सब्जी की फसल को नुकसान 73 लाख रुपये से अधिक है। मंडी और चंबा के बाद शिमला व कुल्लू में फसलों को करीब 10-10 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
तीन से छह जुलाई तक सामान्य से 106 प्रतिशत अधिक वर्षा
मानसून के आने पर प्रदेश में तीन से छह जुलाई तक 72 मिलीमीटर वर्षा हुई जो सामान्य से 106 प्रतिशत अधिक थी। कांगड़ा में प्रदेश में सबसे अधिक करीब 240 मिलीमीटर वर्षा हुई जो सामान्य से 206 प्रतिशत अधिक है। मंडी में 195 मिलीमीटर वर्षा हुई जो सामान्य से 281 प्रतिशत अधिक रही
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