गुजरात के सूरत में गीता जयंती पर आयोजित दूसरे विश्व वैदिक सम्मेलन में थाईलैंड के प्रोफेसर ने सौंपा डी.टी.लिट. और तंत्र-विज्ञानिक उत्कर्ष पुरस्कार, कोस्टल डेमोनोलॉजी में अनूठा शोध बना वजह
5 दिसम्बर 2025
डी० पी०रावत,सम्पादक।
अखण्ड भारत दर्पण (ABD) न्यूज़
न्यूज़ गीता जयंती के पावन अवसर पर गुजरात के सूरत शहर में महर्षि वेदव्यास इंटरनेशनल वर्चुअल वैदिक यूनिवर्सिटी ने इतिहास रच दिया। विश्व प्रसिद्ध तंत्र शास्त्री और कोस्टल डेमोनोलॉजी के विशेषज्ञ तंत्रशिरोमणि डॉ. विश्वजीत विश्वासी को यूनिवर्सिटी ने पोस्ट-डॉक्टोरल डिग्री यानी "डॉक्टर ऑफ तंत्र लिटरेचर (D.T.Litt.)" से सम्मानित किया। साथ ही उन्हें सोने का तमगा यानी गोल्ड मेडल और अंतरराष्ट्रीय स्तर का "तंत्र-विज्ञानिक उत्कर्ष पुरस्कार" भी दिया गया।
ये सम्मान उन्हें थाईलैंड की सुरिंद्रा राजभट यूनिवर्सिटी के मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान संकाय के डीन प्रो. डॉ. सालिंगकर्ण कुलाब्रह्मण कलासिरीभद्रद्वाज ने मंच पर ससम्मान प्रदान किया। विश्व वैदिक सम्मेलन के दौरान ग्रैंड ऑडिटोरियम में सैकड़ों विद्वानों, शोधकर्ताओं और वैदिक विद्या के प्रेमियों की मौजूदगी में यह ऐतिहासिक पल हुआ।
डॉ. विश्वजीत विश्वासी ने तंत्र शास्त्र के दुर्लभ ग्रंथों पर गहन शोध के साथ-साथ कोस्टल डेमोनोलॉजी (तटीय क्षेत्रों में प्रचलित तांत्रिक-असाधारण परंपराओं का वैज्ञानिक अध्ययन) के क्षेत्र में जो क्रांतिकारी कार्य किया है, उसी की वजह से विश्वविद्यालय के चयन समिति ने सर्वसम्मति से उन्हें ये तीनों बड़े सम्मान देने का फैसला किया।
यूनिवर्सिटी के सीईओ और संयोजक आचार्य अमात्य (डॉ. चक्रधर फ्रेंड ‘वेदनिपुण’) ने बताया कि “यह डिग्री किसी सामान्य पीएचडी से कहीं ऊपर की उपाधि है। दुनिया में चुनिंदा विद्वानों को ही जीवन में एक बार मिलती है। डॉ. विश्वजीत ने तंत्र को अंधविश्वास से निकालकर वैज्ञानिक और ऐतिहासिक आधार पर स्थापित किया है।”
कार्यक्रम में देश-विदेश से आए विद्वानों ने तालियां बजाकर डॉ. विश्वजीत का स्वागत किया। अब तक कई किताबें लिख चुके और अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में शोध-पत्र प्रकाशित कर चुके डॉ. विश्वजीत ने मंच से कहा,
“यह सम्मान तंत्र शास्त्र की उस प्राचीन विद्या का सम्मान है जिसे सदियों से गलत समझा गया। मैं इसे भारत की वैदिक-तांत्रिक विरासत को विश्व पटल पर ले जाने के मिशन की पहली सीढ़ी मानता हूँ।”
तो साफ है – सूरत की धरती पर 1 दिसंबर 2025 को न सिर्फ एक शोधकर्ता को डिग्री मिली, बल्कि तंत्र विद्या को मिली नई वैश्विक पहचान!
बधाई हो तंत्रशिरोमणि डॉ. विश्वजीत विश्वासी को!
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