डी.पी. रावत, कुल्लू-निरमण्ड।
अखण्ड भारत दर्पण |
> "इस बार दीपावली पर अगर आप निरमण्ड या आसपास के इलाकों में पटाखे खरीदने जा रहे हैं... तो ज़रा संभल जाइए!
क्योंकि अब प्रशासन ने पूरे उपमण्डल में पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पर सख्त पाबंदी लगा दी है — सिर्फ कुछ तय जगहों को छोड़कर।
आदेश न मानने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू के निरमण्ड उपमण्डल में दीपावली के मद्देनज़र प्रशासन ने एक बड़ा निर्णय लिया है।
एसडीएम मनमोहन सिंह ने आदेश जारी कर दिया है कि उपमंडल क्षेत्र में पटाखों और आतिशबाज़ी सामग्री की बिक्री, परिवहन, भंडारण और उपयोग पर प्रतिबंध रहेगा।
हालांकि, प्रशासन ने लोगों की सुविधा के लिए कुछ निर्धारित स्थलों पर सीमित अवधि के लिए बिक्री की अनुमति दी है — ताकि परंपरा भी निभे और सुरक्षा भी बनी रहे।
आदेश का विवरण
14 अक्टूबर 2025 को जारी आदेश संख्या SDM/NMD/MC/2025-380-86 के तहत यह निर्देश जारी किया गया है।
आदेश में कहा गया है कि दीपावली पर्व के अवसर पर बड़ी संख्या में व्यापारी और लोग पटाखों का आयात, बिक्री व उपयोग करने लगते हैं, जिससे दुर्घटनाओं, आगजनी और प्रदूषण की आशंका बढ़ जाती है।
एसडीएम ने अपने आदेश में कहा है कि —
>पटाखों की अवैध बिक्री, परिवहन या उपयोग न केवल जान-माल की हानि का कारण बन सकता है बल्कि आग लगने जैसी गंभीर घटनाओं का जोखिम भी बढ़ा देता है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन
यह आदेश भारतीय सर्वोच्च न्यायालय के वर्ष 2018 के आदेश (Case No. 786/2015) के अनुपालन में जारी किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ निर्देश दिया था कि फायर क्रैकर्स की बिक्री सिर्फ लाइसेंस प्राप्त विक्रेताओं द्वारा, तय स्थानों पर और तय समयावधि में ही की जा सकती है।
किन जगहों पर पटाखों की बिक्री की अनुमति
प्रशासन ने 7 स्थानों को पटाखा बिक्री के लिए चिन्हित किया है। ये सभी स्थान खुले मैदान या बस स्टैंड के आसपास की सुरक्षित जगहें हैं — जहाँ भीड़ नियंत्रित रह सके और अग्नि सुरक्षा के प्रबंध किए जा सकें।
क्रमांक स्थान बिक्री हेतु निर्धारित स्थल
1 निरमण्ड बस स्टैंड के पास खुला मैदान
2 ब्रौ- क्रांति चौक ब्रौ
3 चाट्टी डंपिंग साइट ग्राउंड
4 जगतखाना (1) बस स्टैंड के पास खुला मैदान(2) पुल के पीछे का खुला क्षेत्र
5 अर्सू- बस स्टैंड अर्सू
6 बागीपुल- बस स्टैंड बागीपुल
7 निथर जुण्डवा, आईपीएच कार्यालय के पास खुला मैदान
सिर्फ दो दिन ही मिल सकेगी अनुमति
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पटाखा बिक्री के लिए अस्थायी स्टॉल सिर्फ दो दिनों – 19 और 20 अक्टूबर 2025 को ही लगाए जा सकेंगे।
इसके बाद कोई भी व्यक्ति या व्यापारी उपमण्डल में पटाखों की बिक्री नहीं कर सकेगा।
सिर्फ उन्हीं विक्रेताओं को अनुमति दी जाएगी जिन्होंने प्रशासन से विधिवत लाइसेंस प्राप्त किया हो।
प्रशासन की चेतावनी और जिम्मेदारी
एसडीएम निरमण्ड ने कहा है कि जो भी व्यक्ति बिना अनुमति पटाखों की बिक्री या भंडारण करेगा, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इसके साथ ही आदेश की प्रतियां निम्नलिखित अधिकारियों को भेजी गई हैं, ताकि निगरानी और अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके —
1. उपायुक्त कुल्लू – सूचना और निगरानी के लिए
2. उपमण्डलीय पुलिस अधिकारी आनी – आवश्यक कार्रवाई के लिए
3. निरमण्ड/निथर के कार्यपालक मजिस्ट्रेट – आदेश के क्रियान्वयन हेतु
4. आरएम, एचआरटीसी रामपुर – बस स्टैंड क्षेत्र में स्थान निर्धारण हेतु
5. एसएचओ निरमण्ड व ब्रौ थाना – पेट्रोलिंग और जांच सुनिश्चित करने के लिए
6. एपीआरओ (जनसंपर्क अधिकारी) – आदेश का व्यापक प्रचार करने के लिए
सुरक्षा और पर्यावरण की दृष्टि से अहम कदम
इस आदेश को सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से एक जिम्मेदार पहल माना जा रहा है।
पिछले वर्षों में दीपावली के दौरान कई स्थानों पर आग लगने, चोट लगने और प्रदूषण बढ़ने की घटनाएँ सामने आई थीं।
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशासन का यह निर्णय
> “लोगों को सुरक्षित दीपावली मनाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी जागरूक करेगा।”
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
निरमण्ड बाज़ार के कुछ दुकानदारों का कहना है कि प्रशासन का फैसला भले ही सख्त लगे, लेकिन यह ज़रूरी है।
विक्रेता संजय ठाकुर कहते हैं —
> “पिछले साल कुछ बच्चों को पटाखों से जलने की घटनाएँ हुई थीं। इस बार अगर बिक्री नियंत्रित रहेगी तो दुर्घटनाओं में कमी आएगी।”
वहीं दूसरी ओर कुछ व्यापारी इस फैसले को लेकर चिंतित भी हैं। उनका कहना है कि
> “सिर्फ दो दिन की अनुमति से व्यापार पर असर पड़ेगा, लेकिन अगर प्रशासन सुरक्षा कारणों से ऐसा कर रहा है, तो हम उसका पालन करेंगे।”
बच्चों और अभिभावकों के लिए संदेश
एसडीएम मनमोहन सिंह ने लोगों से अपील की है कि दीपावली पर ग्रीन क्रैकर्स का ही उपयोग करें।
उन्होंने कहा —
> “आतिशबाज़ी से अधिक महत्वपूर्ण है अपनों की सुरक्षा और पर्यावरण की रक्षा। दीपावली रोशनी का त्योहार है, धुएं और शोर का नहीं।”
निष्कर्ष
यह आदेश न सिर्फ कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए बल्कि आम नागरिकों के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा के लिए भी अहम है।
प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि दीपावली की खुशी जिम्मेदारी के साथ ही मनाई जानी चाहिए।
निरमण्ड उपमण्डल प्रशासन का यह कदम आने वाले वर्षों में अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक मिसाल साबित हो सकता है।
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