राजस्थान में बड़े पैमाने पर किया जा रहा आदिवासियों का धर्म परिवर्तन, मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने जताई चिंता
Rajasthan News: राजस्थान में धर्म परिवर्तन के मामले आए दिन सामने आ रहे हैं। पिछले दिनों जयपुर के पास चौमू कस्बे की रैगर बस्ती में हो रही प्रार्थना सभा में धर्म परिवर्तन के आरोप लगे थे। स्थानीय लोगों ने भारी हंगामा किया तो चौमू पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने प्रार्थना सभा में शामिल 50 से ज्यादा महिला पुरुषों को सभा स्थल से हटाया और प्रार्थना कराने आए व्यक्ति को वहां से भगाया।
धर्म परिवर्तन के आरोप तो कई बार लगते हैं लेकिन क्या वास्तव में राजस्थान में धर्म परिवर्तन हो रहा है। भजनलाल सरकार के कैबिनेट मंत्री बाबूलाल खराड़ी का कहना है कि आदिवासी क्षेत्रों में धर्म परिवर्तन हो रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, रोजगार और चिकित्सा के नाम पर गरीब आदिवासियों को गुमराह करके धर्मांतरण करवाया जा रहा है। यह बड़ी चिंता का विषय है।
धर्मांतरण चिंता का बड़ा विषय है – खराड़ी
कैबिनेट मंत्री बाबूलाल खराड़ी रविवार 14 जुलाई को डूंगरपुर दौरे पर रहे। वे डूंगरपुर जिले के प्रभारी मंत्री भी हैं। बजट घोषणाओं के क्रियान्वयन के लिए उन्होंने अधिकारियों की बैठक ली। बैठक के बाद वे मीडिया से रूबरू हुए। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि धर्मांतरण एक बहुत बड़ी चिंता का विषय है। यह क्यों होता है, हमें यह भी सोचना पड़ेगा।
कैबिनेट मंत्री ने आगे कहा कि शिक्षा, रोजगार और चिकित्सा के नाम पर कुछ लोगों द्वारा गरीब आदिवासियों को गुमराह करके धर्मांतरण करवाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि धर्म परिवर्तन करने के बाद वह व्यक्ति आदिवासी नहीं रहता है, ऐसे में वह एसटी के आरक्षण समेत दूसरे फायदे का भी हकदार नहीं होता है। धर्मांतरण करने वाले व्यक्तियों को आदिवासियों के आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए। खराड़ी ने कहा कि आदिवासी समाज के ऐसे लोगों की लिस्टिंग बनाई जाएगी और उनसे आरक्षण का लाभ छीना जाएगा।
आदिवासियों पर राजनीति करना बंद करें मंत्री – रोत
कैबिनेट मंत्री बाबूलाल खराड़ी द्वारा धर्मांतरण के मुद्दे पर बयान देने के बाद बांसवाड़ा डूंगरपुर के सांसद राजकुमार रोत ने भी बयान जारी किया। रोत ने मंत्री बाबूलाल खराड़ी के लिए कहा कि वे आदिवासियों के धर्म परिवर्तन पर राजनीति बंद करें। रोत ने कहा कि आदिवासियों का कोई धर्म परिवर्तन नहीं करा सकता है। आदिवासी सिर्फ आदिवासी हैं। ना तो वे हिंदू हैं और ना ही ईसाई।
ऐसे में आदिवासी समाज के लोगों को गुमराह नहीं करना चाहिए। अगर भाजपा सरकार डीलिस्टिंग करना चाहती है तो सबकी डीलिस्टिंग करे। आदिवासी समुदाय की खुद की अपनी धर्म व्यवस्था है। आदिवासी समुदाय के लोग मानव निर्मित धर्म को नहीं मानते हैं।
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