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शिक्षकों की कमी से जूझ रहा शाक्टी स्कूल, समिति ने लगाई सरकार से गुहार — प्रतिनिधिमंडल मिलेगा शिक्षा मंत्री से

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 विद्यालय भवन निर्माण, सड़क-बिजली व सौर ऊर्जा सुविधा की भी उठाई मांग — जिलाधीश कुल्लू को सौंपा जाएगा ज्ञापन


सैंज (कुल्लू), 6 नवंबर



जिला कुल्लू के शिक्षा खंड सैंज के राजकीय माध्यमिक विद्यालय शाक्टी में गुरुवार को विद्यालय प्रबंधन समिति की विशेष बैठक समिति अध्यक्ष  तीर्थ राम की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में विद्यालय में शिक्षकों की कमी, भवन निर्माण, सड़क और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई।


बैठक में निर्णय लिया गया कि विद्यालय प्रबंधन समिति का एक प्रतिनिधिमंडल शीघ्र ही प्रदेश के शिक्षा मंत्री से मिलेगा, ताकि विद्यालय में टीजीटी आर्ट्स, टीजीटी नॉन मेडिकल और शास्त्री अध्यापक के रिक्त पदों को शीघ्र भरा जा सके। समिति ने बताया कि शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है।

वर्तमान में पीएम श्री राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय शैंशर से अध्यापकों को अस्थायी तौर पर प्रतिनियुक्ति पर भेजा जा रहा है, लेकिन ग्रामीणों ने इस व्यवस्था का विरोध किया है। उनका कहना है कि इससे दोनों विद्यालयों के विद्यार्थियों की शिक्षा बाधित हो रही है।


बैठक में यह भी कहा गया कि प्रदेश में कई शैक्षणिक संस्थान बंद किए जा चुके हैं और उनमें तैनात स्टाफ को अब तक अन्य स्थानों पर नहीं भेजा गया है। समिति ने सरकार से आग्रह किया कि ऐसे अध्यापकों को दुर्गम क्षेत्रों की पाठशालाओं में नियुक्त किया जाए, ताकि वहां के विद्यार्थियों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।

साथ ही, समिति ने शिक्षा विभाग व राज्य सरकार से मांग की कि राजकीय माध्यमिक विद्यालय शाक्टी को अति दुर्गम क्षेत्र (हार्ड एरिया) की श्रेणी में शामिल किया जाए। ग्रामीणों ने बताया कि इस विद्यालय तक पहुंचने के लिए अध्यापकों और विद्यार्थियों को लगभग 40 किलोमीटर पैदल कठिन मार्ग, भूस्खलन क्षेत्रों और नदियों को पार करते हुए जाना पड़ता है। क्षेत्र में सड़क और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव अब भी बना हुआ है।

समिति ने निर्णय लिया कि विद्यालय भवन निर्माण के लिए बजट की मांग को लेकर जिलाधीश कुल्लू को ज्ञापन सौंपा जाएगा। उल्लेखनीय है कि यह विद्यालय 31 अगस्त 2020 को स्तरोन्नत हुआ था, लेकिन आज भी राजकीय प्राथमिक पाठशाला शाक्टी के एक कमरे में ही संचालित हो रहा है।

बैठक में यह भी प्रस्ताव पारित हुआ कि विद्यालय को सौर ऊर्जा (सोलर पैनल) से जोड़ा जाए, ताकि बिजली की समस्या के कारण शिक्षण कार्य बाधित न हो। इसके लिए भी जिलाधीश कुल्लू को अलग से प्रस्ताव भेजा जाएगा।

ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि आजादी के दशकों बाद भी इस क्षेत्र में सड़क व बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव प्रदेश के विकास मॉडल पर सवाल खड़े करता है। समिति ने सरकार से इस क्षेत्र को शीघ्र विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की अपील की है।


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