हज़ारों युवाओं के सपनों पर ब्रेक!
डी० पी० रावत।
ऑनलाइन डैस्क ब्यूरो,9 अक्तूबर।
“युवा सशक्तिकरण” और “हर हाथ को काम” के बड़े-बड़े दावे करने वाली हिमाचल प्रदेश सरकार की योजनाएँ अब युवाओं के लिए मायूसी का सबब बन गई हैं। ज़िला कुल्लू के हज़ारों युवाओं को पिछले लगभग एक साल से कौशल विकास भत्ता और बेरोज़गारी भत्ते की अदायगी नहीं मिल रही है। नवंबर 2024 से कौशल विकास भत्ते की अंतिम किश्त और सितंबर 2024 से बेरोज़गारी भत्ते का भुगतान बंद पड़ा है। परिणामस्वरूप युवाओं को आज अपनी पढ़ाई, कोर्स फीस और रोज़मर्रा के खर्च पूरे करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार के दावे और हकीकत
प्रदेश सरकार ने बार-बार यह दावा किया है कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल विकास और बेरोज़गारी भत्ता योजनाएँ सुचारू रूप से चल रही हैं। लेकिन ज़मीनी सच्चाई कुछ और है।
कौशल विकास भत्ता (Skill Development Allowance) युवाओं को नई तकनीक और कोर्सेज़ करने के लिए दिया जाता था ताकि वे बेहतर रोजगार पा सकें।
बेरोज़गारी भत्ता (Unemployment Allowance) उन युवाओं को राहत देने के लिए था जो अभी नौकरी नहीं पा सके।
मगर अब इन दोनों योजनाओं पर लगभग एक साल से “ताला” लग चुका है।
युवाओं की व्यथा
कुल्लू ज़िले के आनी, निरमंड, बंजार और नग्गर क्षेत्रों से लेकर मनाली और कुल्लू शहर तक हज़ारों युवा इस योजना के लाभार्थी रहे हैं।
आनी की कृतिका ठाकुर, जो टैली का कोर्स कर रही हैं, बताती हैं—
“भत्ते की आखिरी किश्त नवंबर 2024 में मिली थी। उसके बाद से अब तक कुछ नहीं आया। हमें उम्मीद थी कि इससे कोर्स फीस और किताबों का खर्च निकलेगा, लेकिन अब सब कुछ परिवार पर बोझ बन गया है।”
निरमण्ड के संजय नेगी कहते हैं—
“बेरोज़गारी भत्ते का पैसा सितंबर 2024 तक आता रहा। अब करीब एक साल से कुछ नहीं मिला। सरकार ने वादा किया था कि किसी को बीच में निराश नहीं किया जाएगा, लेकिन अब लगता है कि योजनाएँ सिर्फ़ चुनावी वादे थीं।”
आंकड़ों की हकीकत
ज़िला कुल्लू में अनुमानित 12,000 से अधिक युवा कौशल विकास भत्ते के लाभार्थी रहे हैं।
वहीं 8,000 से अधिक युवा बेरोज़गारी भत्ते के लिए पंजीकृत थे।
यदि औसतन ₹1,000 से ₹1,500 मासिक की राशि का हिसाब लगाया जाए, तो लाखों रुपये की अदायगी लंबित है।
विभाग की सफ़ाई
रोज़गार कार्यालय और कौशल विकास मिशन के ज़िला अधिकारियों का कहना है कि फंड की कमी और प्रशासनिक प्रक्रियाएँ देरी की बड़ी वजह हैं।
एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया—
“राज्य सरकार से फंड जारी नहीं हुआ है। जैसे ही बजट मिलेगा, लंबित किश्तों का भुगतान कर दिया जाएगा।”
चुनावी वादे बने बोझ
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार ने बेरोज़गार युवाओं को लुभाने के लिए योजनाओं की शुरुआत तो की, लेकिन उनके वित्तीय स्रोत मजबूत नहीं किए।
2022 और 2024 के चुनावों में इन योजनाओं को बड़े वादे की तरह पेश किया गया।
लेकिन अब लगातार देरी ने युवाओं के विश्वास को तोड़ा है।
आर्थिक जानकारों का कहना है कि यह योजनाएँ सिर्फ़ वोट बैंक की राजनीति का हिस्सा बन गई हैं।
शिक्षा और रोज़गार पर असर
कौशल विकास भत्ते की अदायगी न होने से आईटीआई, पॉलिटेक्निक और निजी कोर्सेज़ कर रहे छात्रों पर असर पड़ा है।
कई युवाओं ने कंप्यूटर कोर्स, भाषा प्रशिक्षण और व्यावसायिक शिक्षा बीच में ही छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा।
बेरोज़गारी भत्ता न मिलने से ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को नौकरी की तलाश के लिए शहरों तक जाना मुश्किल हो रहा है।
युवाओं का गुस्सा
कुल्लू, बंजार और आनी क्षेत्रों में युवाओं ने सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ़ लगातार नाराज़गी जताई है।
कई जगहों पर धरना-प्रदर्शन की चेतावनी दी गई है।
युवाओं का कहना है कि यदि सरकार जल्द ही फंड जारी नहीं करती, तो वे सड़क पर उतरकर विरोध करेंगे।
विशेषज्ञों की राय
शिक्षाविद् कहते हैं कि यह योजनाएँ युवाओं को आर्थिक सहारा देने का मजबूत जरिया थीं। इनके रुकने से युवा निराश और हतोत्साहित हो रहे हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता मानते हैं कि बेरोज़गार युवाओं को राहत देने वाली योजनाओं का टूटना सामाजिक असंतुलन पैदा कर सकता है।
आर्थिक विशेषज्ञ का मानना है कि यदि समय पर भुगतान न हुआ, तो युवाओं का भरोसा टूटेगा और योजनाओं पर सवाल उठेंगे।
आगे की राह
युवाओं की मांग है कि—
1. सरकार तुरंत लंबित किश्तों का भुगतान करे।
2. भविष्य में योजनाओं के लिए स्थायी फंडिंग मैकेनिज्म बनाया जाए।
3. भुगतान में पारदर्शिता और ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम शुरू किया जाए।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने “युवा सशक्तिकरण” के नाम पर जिन योजनाओं का वादा किया था, वे अब युवाओं के लिए चिंता का कारण बन चुकी हैं। ज़िला कुल्लू में कौशल विकास और बेरोज़गारी भत्ता पिछले लगभग एक साल से अटका पड़ा है। युवा अब सिर्फ़ इंतजार में हैं—कब आएगी उनकी आखिरी पड़ी किश्त?
