प्रदेश के कंप्यूटर शिक्षकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। हाईकोर्ट ने लगभग 20 वर्षों से आउटसोर्स के आधार पर सेवाएं दे रहे कंप्यूटर शिक्षकों को नियमित करने के आदेश जारी किए हैं। न्यायमूर्ति सत्येन वैद्य की अदालत ने मनोज कुमार शर्मा सहित 22 शिक्षकों की वर्ष 2016 में दायर याचिका को स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि इन शिक्षकों को पेरेंट टीचर्स एसोसिएशन (PTA), ग्रामीण विद्या उपासक (GVU) और प्राइमरी असिस्टेंट टीचर्स (PAT) की तर्ज पर नियमित किया जाए।
अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता लंबे समय से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं और राज्य सरकार की निष्क्रियता इस मामले में रिट अधिकारिता के प्रयोग का आधार बनती है। कोर्ट ने प्रतिवादियों की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि आउटसोर्स से लगे शिक्षक और अन्य श्रेणियों के शिक्षकों की स्थिति अलग है। अदालत ने इसे स्पष्ट भेदभाव करार दिया।
कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने 2 दशक से ज्यादा समय तक सेवाएं दी हैं और 1,000 से अधिक पदों का सृजन उनके काम की स्थायी प्रकृति को दर्शाता है। केवल इसलिए कि उनकी नियुक्ति आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम से हुई, राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकती।
हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश दिए हैं कि वह 12 सप्ताह के भीतर पूरी प्रक्रिया पूरी कर शिक्षकों को कम से कम याचिका दाखिल करने की तारीख से नियमित करे।
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