23 साल बाद रद्द हुआ कानून, पुश्तैनी खेती करने वाले किसानों में रोष
डी० पी० रावत और तारा चन्द सिंघा।
आनी,8 अगस्त।
हिमाचल किसान सभा और हिमाचल सेब उत्पादक संघ आनी इकाई ने शुक्रवार को संयुक्त बैठक कर भूमि के मुद्दे पर बड़ा आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया। बैठक की अध्यक्षता प्रताप ठाकुर ने की।
बैठक में बताया गया कि भाजपा की तत्कालीन सरकार ने साल 2000 में लैंड रेवेन्यू एक्ट में धारा 163-A जोड़ी थी और 2002 में नियम संशोधित कर 20 बीघा तक सरकारी भूमि पर काबिज़ किसानों का कब्ज़ा नियमित करने का प्रावधान किया गया था। इस कानून के तहत प्रदेश भर के लाखों किसानों-बागवानों ने आवेदन किया था, क्योंकि वे पीढ़ियों से इन जमीनों पर खेती कर रहे थे।
लेकिन 5 अगस्त 2025 को आए फैसले में 23 साल बाद यह प्रावधान पूरी तरह रद्द कर दिया गया। इससे किसानों और बागवानों में गहरा आक्रोश है।
संयुक्त बैठक में तय किया गया कि 13 अगस्त को आनी में जोरदार प्रदर्शन होगा और इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाएगा। संगठन की मांग है कि प्रदेश सरकार हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाए और साथ ही गरीब किसानों को कम से कम 5 बीघा भूमि दी जाए।
संगठनों ने सभी किसानों-बागवानों से अपील की है कि वे इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में शामिल हों।
बैठक में गीता राम (सचिव, हिमाचल किसान सभा आनी), हेम राज (सचिव, हिमाचल सेब उत्पादक संघ), टिकम, वीर सिंह, ओमी चन्द, डोला सिंह, दौलत, लच्छी, राम कृष्ण, भगत राम समेत कई किसान नेता मौजूद रहे।
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