(पारो शैवलिनी की रिपोर्ट)
चित्तरंजन रेलनगरी के अमलादही बाजार स्थित कस्तूरबा गाँधी उच्च विद्यालय के पास बने पुनर्जन्म भवन पर गत् सोमवार 19 मई को इस पर बुलडोजर चलाने के लिए एक नोटिस चिपका दिया था ।जिससे स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया। पुनर्जन्म भवन के संस्थापक व सलाहकार सोमनाथ दास ने अखंड भारत दर्पण के संपादक पत्रकार पारो शैवलिनी को बताया कि 1986 में एक झोपड़ी से इसकी यात्रा का शुभारंभ हुआ था जो आज पूरी तरह से एक भवन का रूप ले लिया है। झोपड़ी से भवन तक के इस 40 वें सफर में अबतक 26हजार 919 यूनिट रक्त संग्रह,5 हजार पाँच सौ से भी अधिक महिला व पुरुष का मोतियाबिन्द ऑपरेशन,दो सौ उन्नीस नेत्रदान पूरा किये।
सोमनाथ बाबू ने आगे कहा,पश्चिम बंगाल की ममतामयी सरकार ने 1994 में संस्था का पंजीकरण भी कर दिया ।2000 साल में इसकी भूमि स्थायित्व के लिए सीएम से अपील भी किया जा चुका है।बावजूद,अगर चिरेका प्रशासन बगैर इसकी सच्चाई जाने इस तरह का कदम उठाती है तो इसे उसकी बेवकूफी नहीं तो क्या समझा जा सकता है। इससे संबंधित सारे दस्तावेज के साथ हमलोग की चिरेका के वर्तमान महाप्रबंधक विजय कुमार जी से मिलने की योजना बना ही रहे थे कि आनन-फानन में चिरेका प्रशासन ने वहां पर चिपकाये गये नोटिस को हटा दिया। कहा जा सकता है कि चिरेका प्रशासन की अपनी गलती का अहसास होता है मगर देर से।
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