यह उत्सव विशेष कर देव कार्यविधि के रूप में मनाया जाता है देवता के कार करिंदे इस देवविधि की कार्यवाही को निष्ठापूर्वक निभाते हैं इसमें देवता नाग दूर दराज़ से आए हुए समस्त भगतजनों की मनोकामना पूरी करते है। नाग देवता के करदार श्याम चंद का कहना है कि यह फागली उत्सव की देव परम्परा का निर्वहन सदियों से किया जा रहा है क्योंकि समाज में भाई चारा और आपसी मेल मिलाप के लिए इन परम्पराओं को संजो के रखना खास कर देवलू समाज के लिए बहुत जरूरी है।
जिला कुल्लू की सैंज घाटी के शैशर में फागली उत्सव का आगाज़ हुआ गया है । यह उत्सव नाग देवता को समर्पित है इस उत्सव में विशेष रूप से अश्लील गालियां देकर बुरी शक्तियों को भगाया जाता है। फागली उत्सव मकर सक्रांति से शुरू होकर आगे दो दिन तक चलता है इस दिन नाग देवता अपने मडार (देवता का विशेष घर ) चनाहीड़ी गांव से पुरे लाव लश्कर के साथ ढोल नगाड़ों की थाप पर फागली उत्सव के लिए रवाना होते हैं और पच्याड़ी गांव में फागली उत्सव का आगाज़ होता है।
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