देवभूमि हिमाचल प्रदेश में धार्मिक स्थलों की पवित्रता बनाए रखने को लेकर सर्व देवता सेवा समिति ने बड़ा कदम उठाया है। समिति ने राज्य सरकार से मांग की है कि भविष्य में बनने वाली सड़कें मंदिरों और देवस्थलों से कम से कम तीन किलोमीटर की दूरी पर ही बनाई जाएं। समिति का कहना है कि धार्मिक स्थलों के आसपास आधुनिक ढांचे और अव्यवस्था ने देव आस्था को ठेस पहुँचाई है, जिसके कारण देवभूमि आपदाओं की चपेट में आ रही है।
बैठक में उठी बड़ी चिंताएं
देव सदन मंडी में हुई समिति की कार्यकारिणी की बैठक की अध्यक्षता अध्यक्ष शिव पाल शर्मा ने की। बैठक में कुल्लू और मंडी के दर्जनों गुर, पुजारी और कारदार शामिल हुए। इस दौरान हाल ही में आई प्राकृतिक आपदा और देवस्थलों पर बढ़ती अव्यवस्थाओं पर गहन चर्चा की गई।
गुरों और पुजारियों ने बताया कि श्रद्धालु देवस्थलों की मर्यादा भुलाकर पिकनिक मनाने, शराब पीने और गंदगी फैलाने जैसी गतिविधियों में लिप्त हो रहे हैं। यह आस्था और परंपरा के खिलाफ है।
देव आस्था से छेड़छाड़ पर सख्ती
अध्यक्ष शिव पाल शर्मा ने स्पष्ट कहा कि देव आस्था से खिलवाड़ करने वाले शरारती तत्वों के खिलाफ अब सख्त रवैया अपनाया जाएगा। यदि कोई समिति सदस्य ही देव परंपराओं का उल्लंघन करता पाया गया तो उसे तत्काल बर्खास्त किया जाएगा और उसकी जगह चरित्रवान व्यक्ति को देवकार्य की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
आपदा को बताया ‘मानव निर्मित’
समिति ने हाल ही में आई प्राकृतिक आपदा को “मानव निर्मित आपदा” बताया और कहा कि धार्मिक स्थलों में छेड़छाड़ और अव्यवस्था ही इसका मूल कारण है। समिति ने सरकार से मांग की है कि देवभूमि की पवित्रता को बचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, वरना देव संस्कृति और श्रद्धालुओं की आस्था को गहरा आघात पहुंचेगा।
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