डॉक्टर सर से मेरी मुलाकात जमालपुर लौहनगरी में हुई थी। रेलवे के ईस्ट कॉलोनी में स्थित एक ऐतिहासिक हाल जिसे पूर्व में थियेटर के रूप में जाना जाता था।कहा जाता है हिन्दी सिने जगत के पितामह पृथ्वीराज कपूर और उनके सुपुत्र शशि कपूर इस थियेटर पर अपने अभिनय की छटा बिखरे चुके हैं। ऐसे ही ऐतिहासिक थियेटर में आज से लगभग बीस साल पूर्व जमालपुर एक्सप्रेस के संपादक सकलदेव दास की अगुवाई में आयोजित कार्यक्रम में मेरी पहली मुलाकात पर्यावरण के इस संत से हुई थी। पहली नजर में ये मुझे हास्य-व्यंग्य के रचयिता अशोक चक्रधर से लगे।लेकिन,जब इन्हें सुना तो ऐसा लगा जैसे खालिश व्यंग्य के माध्यम से ये पेड़-पौधों की दास्तान कहने में इन्हें महारत हासिल है। इनकी " हरित वसुंधरा " पत्रिका बरवस मुझे अपने पसंदीदा गायक मुकेश और अभिनेता जितेन्द्र कपूर की याद दिला देता है जब मुकेश की आवाज़ मेरे कान में इन शब्दों को उतार देती है--" हरी-हरी वसुंधरा पे नीला-नीला ये गगन। " मैं 1971 में अपने पिता के निधन के बाद पैतृक निवास जमालपुर आया था। 1984 तक जमालपुर में रहा। अनगिनत कारनामे किये।डॉक्टर सर से प्रेरित होकर अपने निवास "गौरी सदन" के बगीचे से दिल लगा बैठा। आम,अमरूद,अनार,मेहंदी के साथ हरी मिर्च,कद्दू,आलू और ना जाने क्या-क्या उगाने लगा। संत तो नहीं बन पाया। हाँ,मेरी डायरीनुमा धरती पर गीत,गज़ल,कवितायें,लघुकथा,नाटक,एकांकी आदि भी उपजने लगे। डॉक्टर सर ने पटना में भी जहाँ डेरा डाला वो भी कंकड़ के ही बाग में । कहते हैं कंकड़ में कैक्टस उसी तरह पनपता है जैसे कीचड़ में कमल।डॉक्टर सर से सोमवार को बुद्ध पूर्णिमा के दिन(बारह मई 2025)बात हो रही थी।कहने लगे,बरसात में काफी असुविधा होती है।नाले का पानी घर में घुसने के लिए घुसपैठ करने का प्रयास करता है। लेकिन,मजाल है घुसपैठ कर सके।जैसा हमारी बहादुर सेना ने पाकिस्तान को मुहतोड़ जवाब दिया है,वैसे ही डॉक्टर सर ने भी मुँह तोड़ कर जबाव दिया है। अंत में, महान स्वतंत्रता सेनानी नेता जी सुभाष चन्द्र बोस के दमदार नारे " तुम मुझे खून दो,मैं तुम्हें आजादी दूँगा " की तरह पर्यावरण को समर्पित पारो शैवलिनी का यह नारा भी उतना ही शानदार व जानदार है।" तुम मुझे संरक्षण दो,मैं तुम्हें हरियाली दूंगा। जीवन भर खुशहाली दूंगा।"
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