हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में रहने वाले हरिमन शर्मा ने सेब की खेती में बदलाव लाया है। HRMA-99 एक सेब की किस्म है जो कम ठंडे क्षेत्रों में उगती है। यह किस्म 1800 फीट की ऊंचाई पर भी उगती है। हरिमन शर्मा ने इस प्रजाति को विकसित किया है, जिसके 14 लाख पौधे दुनिया भर में बागबानों ने लगाए हैं।
पुराने समय में कहा जाता था कि अगर आप सेब के पौधे देखना चाहते हैं या ताजे सेब का स्वाद लेना चाहते हैं तो राज्य के ऊंचाई वाले इलाकों में जाना चाहिए। सेब को गर्म इलाकों में बाजार में ही देखा जा सकता है। हरिमन शर्मा, जिला बिलासपुर के उपमंडल घुमारवीं के तहत गलासीं गांव निवासी, ने इस विचार को बदल दिया।
गणतंत्र दिवस पर हरिमन शर्मा को पद्मश्री सम्मान मिला है। उन्हें गर्म क्षेत्र में सेब उत्पादन करने से उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई, साथ ही इसकी आपूर्ति कर पड़ोसी राज्यों में मिठास भर दी गई।
हरिमन शर्मा ने एचआरएमएन-99 नामक कम ठंडे क्षेत्रों में उगने वाली सेब की किस्म विकसित की है। यह किस्म समुद्र तल से 1800 फीट की ऊंचाई पर भी उगती है। यह सेब उत्पादन के इतिहास में एक आविष्कार था। पुराना क्षेत्र का सेब जुलाई से सितंबर तक बनता है, लेकिन गर्म क्षेत्र का सेब जून में बनता है।
हरिमन शर्मा की इस प्रजाति के 14 लाख पौधे भारत, नेपाल, बांग्लादेश, जाम्बिया और जर्मनी के एक लाख बागबानों ने लगाए हैं। इसके अलावा, 1.9 लाख से अधिक पौधे छह हजार से अधिक लोगों को दिए गए हैं। हरिमन अपने बाग में सेब के अलावा कीवी, अनार और आम भी उगाते हैं।
हरिमन का सफर
सात जुलाई 2007 को, वह शिमला सचिवालय में तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल से मिलने पहुंचे, 10 किलो सेब और पांच किलो आम लेकर और बताया कि ये दोनों फल बिलासपुर में उगाए गए हैं। 40 से 45 डिग्री तापमान में भी यह सेब तैयार हो सकता है।
इस पर तभी मुख्यमंत्री ने बैठक करके उनके बगीचे का निरीक्षण करवाया। 15 अगस्त 2008 को मुख्यमंत्री ने प्रेरणास्रोत सम्मान से सम्मानित किया। यह उनका पहला सम्मान था। अब तक उन्हें 15 राष्ट्रीय पुरस्कार, 10 राज्य पुरस्कार और पांच अतिरिक्त पुरस्कार मिले हैं।
हरिमन शर्मा का व्यक्तित्व क्या है?
हरिमन शर्मा का जन्म चार अप्रैल 1956 को डाकघर दाभला, तहसील घुमारवीं, जिला बिलासपुर में ग्राम गलासीं में हुआ था। वह सिर्फ तीन दिन के थे जब उनकी माता मर गई। बाद में रिडकु राम, ग्राम पनियाला, डाकघर कोठी, तहसील घुमारवीं ने इन्हें अपनाया। दसवीं कक्षा तक वे पढ़े गए हैं।
हरिमन क्या कहते हैं?
हरिमन बताते हैं कि पद्मश्री सम्मान का नाम सुनते ही वे खुश हो जाते हैं। वह पुरस्कार को प्रोत्साहन मानेंगे और इसके अनुसार काम करेंगे। वह इस वर्ष सेब के साथ एवोकाडो लगाने पर भी काम कर रहे हैं। यह फल बहुत महंगा है और आम लोगों से दूर है, इसलिए इस पर तेजी से काम किया जाएगा।
यदि इसकी उपलब्धता बढ़ती है, तो यह सभी लोगों तक पहुंच जाएगा और इसका उत्पादन बागवानों की आय का एक मजबूत साधन बन जाएगा।
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