डी०पी० रावत
28अगस्त (आनी)।
ऋषि पंचमी के पावन पर्व पर आज से दलाश (विकास खंड आनी) स्थित जगेश्वर महादेव मंदिर में भौदरी जातरा धूमधाम से शुरू हो गई। परंपरा के मुताबिक इस दिन को क्षेत्र में भदरौंजो कहा जाता है।
पहला दिन पशुओं के नाम
मान्यता है कि भगवान जगेश्वर महादेव ने अपने इस भव्य उत्सव का पहला दिन अपने वाहन नंदी महाराज और अन्य पशुधन को समर्पित किया है। यह स्वरूप भगवान शिव के पशुपतिनाथ रूप को दर्शाता है।
सुबह नंदी महाराज को अर्पित हुई "मंडेड़ी"
सुबह-सुबह श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर नंदी महाराज, जिन्हें स्थानीय बोली में ‘कदार बाच्छू’ कहा जाता है, को वनफूलों की माला ‘मंडेड़ी’ पहनाते हैं और घृत (घी) का भोग लगाते हैं।
शाम को महाभद्र रथ पर निकलते हैं भगवान
शाम को प्रदोष काल में भगवान जगेश्वर महादेव अपने महाभद्र रथ पर विराजमान होकर परंपरागत सौह यात्रा के लिए प्रस्थान करते हैं। इस दौरान स्थानीय गाय-बैल भी उत्सव का हिस्सा बनते हैं और इनके बीच पारंपरिक नृत्य होता है।
आस्था और संस्कृति का संगम
भौदरी जातरा न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि यह क्षेत्र की पशुपालन संस्कृति और ग्रामीण जीवन शैली की भी झलक दिखाती है। सदियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी लोगों में वही श्रद्धा और उत्साह जगाती है।
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