डी० पी० रावत और कीमत राम जोशी।
निरमण्ड,14 जून।
हिमाचल प्रदेश के ज़िला कुल्लू की विकास खण्ड निरमण्ड के तहत ग्राम पंचायत भालसी के गांव खनोटा में लगभग पिछले पांच दशकों से "मानी जाच" मेला पारंपरिक अंदाज़ में मनाया जा रहा है।
ग्राम पंचायत निशानी के अन्तर्गत गांव मातला क़रीब 85 वर्षीय निवासी सेस राम ने ए० बी० डी० न्यूज़ को दिए एक साक्षात्कार में बताया कि निशानी गांव के निवासी "मानी" नामक नि:संतान व्यक्ति ने पिछले पांच दशक पूर्व इस मेले को अपने नाम पर आयोजित करने की पहल देवी सरमासनी पुजारली के सान्निध्य मात्र एक सौ पच्चास रूपये से शुरु की थी।
उन्होंने बताया कि उक्त व्यक्ति ने भारतीय सेना के एक फौजी के रूप में भारत पाकिस्तान युद्ध 1971 लड़ा था।
तब से आज तक यह मेला निर्बाध रूप से आयोजित हो रहा है।
ग्राम पंचायत निशानी के पूर्व प्रधान पूर्ण चन्द ने बताया कि शुरू में या मेला "कूटा बा" (पहाड़ी बोली में "बा" : बावड़ी) के साथ लगता था।
कालान्तर में इस मेले का आयोजन खनोटा गांव में होता रहा है।
इस मेले में इस वर्ष क्षेत्र के देवी सरमासनी पुजारली अर्थात सुनैरी देवी,देवी दुर्गा दुराह,देवता माटी सिंह कोट, बना देऊ अर्थात शिवजी सिरकोटि और राई नाग आदि पांच देवी देवताओं ने अपने पूरे लव लश्कर के साथ शिरकत की।
इस अवसर पर मेले में शरीक हुए स्त्री पुरुषों ने स्थानीय परिधानों में सजधज कर परम्परागत सामूहिक नृत्य "नाटी"पेश किया।
इसके अतिरिक्त इस मेले का शुभारंभ ज़िला परिषद् सदस्य बाड़ी देवेंद्र नेगी बतौर मुख्यातिथि शामिल हुए।
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