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शादी का वादा तोड़ना या ब्रेकअप करना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं हो सकता.

High Court, Suprime Court,IPC

 


सुप्रीम कोर्ट ने एक आत्महत्या मामले में बड़ी टिप्पणी की है। शुक्रवार को अदालत ने कहा कि टूटे हुए रिश्ते भावनात्मक रूप से कष्टदायक होते हैं, और अगर आत्महत्या के लिए उकसावे का कोई इरादा न हो तो यह खुद-ब-खुद उकसाने के अपराध की श्रेणी में नहीं आते। जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने एक फैसले में यह टिप्पणी की। 

सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले को पलटा

सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाई कोर्ट के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें कमरुद्दीन दस्तगीर सनदी को आईपीसी के तहत धोखाधड़ी और आत्महत्या के लिए उकसाने के अपराध में दोषी ठहराया गया था। फैसले में कहा गया, ‘यह टूटे हुए रिश्ते का मामला है, न कि आपराधिक आचरण का।’ सनदी पर शुरू में आईपीसी की धारा 417 (धोखाधड़ी), 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और 376 (बलात्कार) के तहत आरोप लगाए गए थे

निचली अदालत ने उसे सभी आरोपों से बरी कर दिया, जबकि कर्नाटक हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की अपील पर उसे धोखाधड़ी और आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी ठहराया और पांच साल की कैद की सजा सुनाई। अदालत ने उस पर 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। मां के कहने पर दर्ज की गई एफआईआर के अनुसार, उसकी 21 साल की बेटी पिछले आठ साल से आरोपी से प्यार करती थी और अगस्त 2007 में उसने सुसाइड कर लिया था, क्योंकि आरोपी ने शादी का वादा पूरा करने से मना कर दिया था।

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