लोकेंद्र सिंह वैदिक, ब्यूरो हिमाचल।
हिमाचल प्रदेश की गोशालाओं, गोसदनो और गो-अभयारण्यों में एनजीओ को गाय पालने पर मिलने वाली राशि को बढ़ाने की तैयारी है। सहायता योजना के तहत अभी सरकार एक एनजीओ को प्रति गाय 500 रुपए की राशि देती है, लेकिन आने वाले समय में इसमें बढ़ोतरी करने की योजना है। राज्य सरकार ने इस योजना के तहत मिलने वाली राशि को बढ़ाकर 500 रुपए से 700 रुपए करने के लिए गोसेवा आयोग को प्रस्ताव भेजा है।
ऐसे में अब गो सेवा आयोग की बैठक में इस पर फैसला हो सकता है। हिमाचल प्रदेश गोसेवा आयोग द्वारा प्रदेश में बेसहारा गोवंश के संरक्षण को गोसदन-गोशाला एवं गो-आरण्य को सहायता योजना के अंतर्गत 500 रुपए प्रति गाय प्रतिमाह प्रदान किए जा रहे हैं। विभिन्न गैर सरकारी संगठनों के माध्यम से संचालित की जा रही गौशालाओं की गोरक्षा निधि बढ़ाने पर भी बैठक में विचार किया गया। गौशाला में संरक्षित गौवंश की बेहतरीन निगरानी के लिए सुपरवाइजर की भी तैनाती करने पर विचार किया जा रहा है। तीन वर्ष पूर्व गठित गोसेवा आयोग बेसहारा गोवंश के संरक्षण के लिए बेहतर कार्य कर रहा है। वर्तमान में प्रदेश में 15 बड़ी गोशाला एवं गोवंश अरण्य स्थापित किए जा रहे हैं, जिनमें से आठ का कार्य पूर्ण हो चुका है। इनके निर्माण पर लगभग 31 करोड़ रुपए व्यय किए जा रहे हैं। वर्तमान में लगभग 18 हजार गोवंश को इनमें आश्रय दिया गया है। प्रत्येक जिला में स्थापित होने वाले गोविज्ञान केंद्रों के माध्यम से भारतीय मूल की गोवंश के अनुसंधान को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की गई है।
हर जिला में बनाई जाएंगी स्मार्ट गोशालाएं
पशुपालन मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि प्रदेश सरकार गोसेवा आयोग के माध्यम से बेसहारा गोवंश के संरक्षण के लिए कई कारगर कदम उठा रही है। प्रत्येक जिले में स्मार्ट गोशाला स्थापित की जा रही हैं। वर्तमान में सोलन एवं कांगड़ा में स्मार्ट गोशाला की स्थापना के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इन गौशालाओं की क्षमता तीन हजार गोवंश होगी। संचालक यहां पर 20 प्रतिशत दुधारू गौवंश रख सकेंगे।
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