बंजार, 26 फरवरी।
परस राम भारती, संवाददाता।
अखण्ड भारत दर्पण (ABD) न्यूज़ : हिमाचल के उभरते पर्यटन हब जिभी में संगठनात्मक राजनीति ने रफ्तार पकड़ ली है। जिभी वैली टूरिज्म डेवलपमेंट एसोसिएशन (JVTDA) की नई कार्यकारिणी के गठन के लिए 7 मार्च को होने वाले चुनाव अब चर्चा के केंद्र में हैं। चुनाव समिति की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार 3 मार्च तक नामांकन और 5 मार्च तक नाम वापसी की अंतिम तिथि तय की गई है, जबकि 7 मार्च को सुबह 11 बजे जिभी स्थित कार्यालय में मतदान होगा।
🔎 चुनावी गणित और सख्त शर्तें
इस बार चुनाव में पारदर्शिता और अनुशासन पर विशेष जोर दिया गया है।
हर उम्मीदवार सिर्फ एक पद के लिए ही नामांकन कर सकेगा।
वही सदस्य चुनाव लड़ और वोट दे सकेंगे, जिनकी सदस्यता शुल्क पूर्ण रूप से जमा है।
पिछले तीन वर्षों से नियमित व सक्रिय सदस्य होना अनिवार्य किया गया है।
मतदान गुप्त मतपत्र से होगा, ताकि निष्पक्षता बनी रहे।
चुनाव आयुक्त जगदीश चंद और मुख्य चुनाव आयुक्त संदीप कंवर ने सभी सदस्यों से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी की अपील की है और संगठन की एकता व गरिमा बनाए रखने पर जोर दिया है।
जिभी और बंजार क्षेत्र में पर्यटन तेजी से बढ़ा है, लेकिन इसके साथ अव्यवस्थित निर्माण, ट्रैफिक दबाव, कचरा प्रबंधन और होम-स्टे रेगुलेशन जैसे मुद्दे भी उठे हैं। ऐसे में यह चुनाव सिर्फ पदों की होड़ नहीं, बल्कि नीतिगत दिशा तय करने की कसौटी माना जा रहा है।
क्या नई टीम स्थानीय हितों और पर्यावरण संतुलन के बीच बेहतर तालमेल बना पाएगी?
क्या पर्यटन विकास में पारदर्शिता और समन्वय को प्राथमिकता मिलेगी?
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह चुनाव जिभी के पर्यटन मॉडल के भविष्य को प्रभावित कर सकता है। यदि नई कार्यकारिणी दूरदर्शी नीति के साथ आगे बढ़ती है, तो जिभी राष्ट्रीय स्तर पर एक सस्टेनेबल टूरिज्म मॉडल बन सकता है।
📌 ABD न्यूज़ विश्लेषण
अखण्ड भारत दर्पण (ABD) न्यूज़ का मानना है कि संगठनात्मक लोकतंत्र की मजबूती ही पर्यटन विकास की असली कुंजी है। 7 मार्च का परिणाम न केवल नई नेतृत्व टीम तय करेगा, बल्कि जिभी के पर्यटन उद्योग की दिशा और विश्वसनीयता भी तय करेगा।
अब देखना दिलचस्प होगा कि सदस्य परंपरा को चुनते हैं या बदलाव को — क्योंकि इस बार जिभी की सियासत सिर्फ वोट नहीं, विज़न भी मांग रही है।
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