बिलासपुर जिला के क्षेत्रीय अस्पताल में आज शहीदी दिवस व विश्व कुष्ठ रोग दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ प्रवीण कुमार ने बताया कि हर वर्ष राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पुण्यतिथि पर कुष्ठ रोग निवारण दिवस मनाया जाता है। यदि दिवस रोग उन्मूलन और रोग निवारण के लिए विभिन्न प्रयासों और जागरूकता के लिए मनाया जाता है। कार्यक्रम में महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर 2 मिनट का मौन भी रखा गया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ प्रवीण कुमार ने बताया कि बिलासपुर जिला में कुष्ठ रोग को जड़ से समाप्त करने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिला बिलासपुर में 12 कुष्ठ रोगियों का इलाज चल रहा है। विभाग द्वारा सतर्कता बरतते हुए गत वर्ष 8 कुष्ठ रोगियों की पहचान की गई है जिनका भी इलाज शुरू कर दिया गया है।
यह एक जीर्ण संक्रमण रोग है। इससे त्वचा, श्वसन तंत्र, आंखें और तंत्रिकाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। यह बीमारी मायकोबैक्टीरियम लैप्री नामक जीवाणु के चलते होती है। आधुनिक समय में इसका टीका उपलब्ध है। अतः कुष्ठ रोग अब संक्रामक नहीं है। हालांकि, मरीज के लगातार संपर्क में बने रहने से संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाता है। इसके लिए कुष्ठ रोग के मरीजों को टीका लेना चाहिए। वहीं, मरीज के आगुंतकों को भी आवश्यक सावधानियां जरूर बरतनी चाहिए।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ प्रवीण कुमार ने बताया कि पूर्व में कुष्ठ रोग के प्रति ऐसा मत था कि यह रोग छूने से फैलती है। यह सरासर गलत और भ्रामक है।
उन्होंने बताया कि समय पर चिकित्सक को दिखाने पर कुष्ठ रोग रोग का इलाज 6 माह से 1 वर्ष के बीच संभव है। इस रोग का समय पर जांच करवाने पर किसी भी प्रकार की अपंगता से बचा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि कुष्ठ निवारण के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए रोग का जल्दी पता लगाने के साथ-साथ इस रोग को फैलने से रोकने के लिए प्रयास करना अति महत्वपूर्ण है। लोगों को रोगियों से भेदभाव न करने के लिए जिले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा 30 जनवरी से 14 फरवरी 2023 तक स्पर्श कुष्ठ रोग जागरुकता अभियान चलाया जाएगा। इसके अंतर्गत कुष्ठ रोग के मरीजों की तलाश की जाएगी तथा जनसाधारण को जागरूक भी किया जाएगा।
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